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Amaya...Ek maa ki maya,

खुले आसमान में बेख़ौफ़ ,आज़ाद उड़ती हुई पतंग की जब डोर कटती है और जिस तरह वह जमीन पर पड़ी मिलती है ठीक उसी तरह आज  अमाया  अपने स्वीमिंग पूल के पास अपनी पसंदीदा कुर्सी और अपने पसंदीदा Scotch के साथ चाँद को निहारती ऐसे,..... जैसे अपने ज़िंदगी की आखिरी पल को गुज़रते देख रही हो......                                             समय तो रात का है पर इतना अँधेरा भी नहीं, की कोई उसके चेहरे की बेज़ारी को पढ़ न सके और उसके टूटने का दर्द उसके आँखों में देख न सके !! Mom.... mom .....  आवाज लगाती हुई माया,.....वहाँ आती है और  अमाया  के पास बैठती है ,उसके बिखरे हुए बालों को सवारती हुई माया, फिर कहती है...... Mom, तभी  अमाया  उसके हाथों पर अपना हाथ रख उसे रोकती है !! अमाया -  किसी का प्यार पाना इस दुनियाँ में इतना मुश्किल क्यों होता है ? माँ की शक़्ल देखी नही और पिता का प्यार कभी दिखा नही........ सारा बचपन इसी कोशिश में बीता,प्यार...